Latest News     26 Jun, 2017, सोमवार को अहमदाबाद (कर्णावती) में श्रीपथमेड़ा महाराजजी के सान्निध्य में गोभक्त कार्यकर्त्ताओं  की "विशेष बैठक"         कलकत्ता महानगर में ६ जुलाई से ४ सितम्बर २०१७ तक परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज का पावन “चातुर्मास गो मंगल महोत्सव 2017”         9 जुलाई , 2017 संवत् 2074 की आषाढ़ शुक्ल पूर्णिमा श्रीगुरु अवतरण दिवस ‘व्यास पूर्णिमा’ कलकत्ता महानगर में पूज्या गोमाता एवं परम श्रद्धेय गोऋषि श्रीस्वामीजी महाराज के सान्निध्य में|    

अतिआधुनिक गो चिकत्सालय

महत्वपूर्ण विभाग है ‘‘धनवन्तरी’’

श्रीगोधाम महातीर्थ आनन्दवन पथमेड़ा का सबसे महत्वपूर्ण विभाग है ‘‘धनवन्तरी’’ ! गोधाम पहुँचने वाले प्रत्येक अनाश्रित लूले-लंगड़े, अंधे, अपंग, लाचार, दूर्घटनाग्रस्त एवं कत्लखानों में जा रहे छुड़ाए गये गोवंश को सर्वप्रथम यहीं प्रवेश मिलता है। धनवन्तरी में प्राथमिक ‘‘चैकअप व ईलाज’’ पश्चात गोवंश को उनकी शारीरिक स्थिति एवं सेवा-सुरक्षा की आवश्यकता के अनुसार बनायी गयी श्रेणीयों के विभागों में ‘‘रैफर’’ कर दिया जाता है तथा गंभीर रूप से लाचार,बीमार, दूर्घटनाग्रस्त व वृद्ध गोवंश को धनवन्तरी में पूर्ण स्वास्थ्य लाभ मिलने तक रखा जाता है।
‘‘धनवन्तरी’’ में गोमाता की पीड़ा शीघ्रातिशीघ्र दूर कैसे हों, इस हेतु संतवृद, बह्मचारी साधक, पूर्णकालिक गोभक्त-गोसेवकजन और बीमारियों को आधुनिक विज्ञान की भाषा में समझने वाले प्रशिक्षित डाक्टर-कम्पाउडर हर समय हाजिर रहते हैं। यह त्रिस्तरीय व्यवस्था गोमाता की सेवा-सुरक्षा में कहीं चूक की गुँजाईश नहीं छोड़ती है। तभी तो पुरा भारत ही नहीं बल्कि पुरा विश्व गोधाम पथमेड़ा की गोसेवा-सुश्रुशा से प्रेरणा लेते हुए नतमस्तक है और आज यह स्थान ‘‘गोधाम महातीर्थ’’ के रूप में तीर्थों का तीर्थ कहलाता है।
गोमाता की कैंसर, गर्भाशय, फैंफड़ों तथा हड्डी एवं घाव आदि सभी बीमारीयों के अलग-अलग विभाग वर्गीकृत तो है हीं, साथ ही अलग-अलग बीमारियों में दिए जा सकने वाला अलग-अलग भोजन निश्चित मापदण्डानुसार गोमाताओं को निश्चित समय पर बदल-बदलकर दिया जाता है। सर्दीयों में वृद्ध गोवंश को दोनों समय (लापसी) मक्की, मैथी, अजवायन, सोआ, खोपरा, गुड़, तेल आदि को पक्का कर खिलाया जाता है, वहीं गर्मियों में ठण्डा रहने वाले ‘‘जौ’’ खिलाये जाते है।
यहाँ पर गोमाताओं की सेवा जन्म देने वाली ‘‘माँ’’ से भी कहीं अधिक आत्मीयता, प्रेम एवं समर्पण से होते देखकर हर कोई आगन्तुक सुखद संवेदनाओं और मानवीय गुणों के प्रति कटिबद्ध व संकल्पित सा हो जाता है। वृद्ध व बीमार गायों को दिन में कई-2 बार स्थान बदलवाना यानि पलटना, उनके बाजु में सहारे के लिए तकिए लगाकर रखने, दिन में दो-दो बार घावों की सफाई कर पट्टियाँ करने, सींग के कैंसर- विभिन्न फ्रैक्चर व पेट के आपरेशन करने, सभी गोवंश के लिए सर्दी में गर्मी में एवं गर्मी में सर्दी रखने के इंतजाम और 24 घण्टे सजग खड़े गोसेवकजन! ये सब दृश्य अद्भूत, अनुपम और अभूतपूर्व सी अनुभूति प्रदान करते हैं।
गोधाम पथमेड़ा के ‘‘धनवन्तरी’’ पहुँचने के बाद पीड़ित गाय के घाव व फ्रेक्चर पर मक्खी तक नहीं पहुँचे तथा गोमाता को स्वंय इस प्रकार हिलना तक नहीं पड़े कि वो और अधिक दुःखी हो, ऐसे सभी प्रबन्ध किए गए हैं। गाय को खड़ी करने, बैठाने, नहलाने, खुजलाने, स्थान बदलने आदि सभी क्रियाओं में परम्परागत चले आ रहे तरीकों के साथ-साथ आधुनिक उपकरणों व मशीनों का भी समावेश किया गया है। ट्रेक्टरों पर आरामदायक स्ट्रेक्चरों के अलावा छोटी व बड़ी ‘‘एम्बुलेंस’’ है, जो जमीन से ही अपनी ‘‘हैड्रोब्लिक पावर’’ की लिफ्ट से बीमार व लाचार गोमाता को अरामपूर्वक ऊपर व नीचे ले लेती है। गोधाम पथमेड़ा के 100-100 वर्ग किलोमीटर तक बीमार, दूर्घटनाग्रस्त एवं लाचार गोवंष को लेने यह ‘‘एम्बुलेंस’’ जाती है। बीमारियों के ईलाज में भी युगोयुग से चले आ रहे देशी प्रयोगों और आधुनिक चिकित्सा के सर्वोत्तम उपायों का मिश्रण यहाँ देखने को मिलता है।
‘‘धनवन्तरी’’ को अतिआधुनिक चिकत्सीय उपकरणों, दवाओं व डाक्टरों सहित एयरकण्डीशनयुक्त बनाने का कार्य जोरों पर जारी है। गोधाम पथमेड़ा के ‘‘धनवन्तरी विभाग’’ में गोमाता के शरीर के किसी भी अंग के एक्सरे, विभिन्न टेस्ट, सोनोग्राफी, बड़े से बडे़ आपरेशन की सुविधा के साथ अत्याधुनिक लैब है।

 

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महत्वपूर्ण विभाग है ‘‘धनवन्तरी’’

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अच्छे सांडों द्वारा संवर्धन

नंदीशाला

श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा के पांच गोसेवाश्रमों श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला- पथमेड़ा, श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ-नन्दगांव, श्रीमहावीर हनुमान गोशालाश्रम-गोलासन, श्रीखेतेश्वर गोशालाश्रम-खिरोड़ी, श्रीठाकुर गोशालाश्रम-पालड़ी तथा श्रीराजाराम गोशालाश्रम-टेटोड़ा सहित जालोर, सिरोही तथा बनासकांठा (गुज.) के गावों में स्थापित दर्जनों गोसंवर्धन केन्द्रों द्वारा प्रतिवर्ष 8,000 से 10,000 गायों का उन्नत भारतीय देशी नस्ल के सांडों द्वारा गर्भाधान करवाकर गोसंवर्धन का कार्य किया जाता है। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा प्रतिवर्श सैंकड़ों उन्नत नस्ल के नन्दी (सांड) तैयार करके देश के विभिन्न गोग्रामों एवं गोशालाओं को दान करता है तथा गरीब किसानों को प्रतिवर्ष सैंकड़ों जोड़ी सशक्त एवं सुडौल बैल निःशुल्क में उपलब्ध करवाता है। नाकारा सांडो को हजारों की संख्या में गोसेवा केन्द्रों में प्रवेश दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त 500 से अधिक गांवो में श्रेष्ठ कुलीन सांड उपलब्ध कराये जा रहे है जिससे एक साथ लाखों वेदलक्षणा गायों का संवर्धन हो रहा है 

  • अच्छे नस्ल के सांड
  • समृद्ध गोपालन
  • Tested under extreme conditions WHAT CLIENTS SAID
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Better Than The Best !!!

8,000 से 10,000 गायों का उन्नत भारतीय देशी नस्ल के सांडों द्वारा गर्भाधान करवाकर गोसंवर्धन का कार्य

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Jerry Mauris

अच्छे नस्ल की बछिय

श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा

आनंदवन

श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा द्वारा श्री गोपाल गोवर्धन गोशाला- पथमेड़ा, श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ-नन्दगांव, श्रीमहावीर हनुमान गोशालाश्रम-गोलासन, श्रीखेतेश्वर गोशालाश्रम-खिरोड़ी, श्रीठाकुर गोशालाश्रम-पालड़ी तथा श्रीराजाराम गोशालाश्रम-टेटोड़ा सहित राजस्थान तथा गुजरात के कई गाँवों में स्थापित गोसेवा आश्रमों में प्रतिवर्ष दस से बारह हजार वेदलक्षणा गोवंश का पालन पोषण करके तैयार किया जाता है। इनकी सेवा में पौष्टिक आहार, हरा चारा, औषधि, स्नान, आदि से प्रेम द्वारा पूर्ण देखभाल की जाती है तथा इनमें से विभिन्न गो प्रजातियों का चयन करके वर्गीकरण होता है। श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा इन वर्गीकृत गो बछड़ियों को संवर्धन हेतु प्रदेश तथा देश के विभिन्न गोशालाओं, गोपालक किसानों तथा गोसेवाश्रमों को सेवा एवं  आजीवन  संरक्षण की शर्त पर निःशुल्क वितरित करता है। साथ ही गुजरात व राजस्थान के 800 गांवो में गोपालक किसानों को प्रोत्साहित कर गोपालन को प्रदेश तथा देशव्यापी बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

  • 800 से अधिक गांवो में गोपालक किसानों को गोपलन के लिये प्रोत्साहन
  • गोपालन से समृद्ध भारत
  • Tested under extreme conditions WHAT CLIENTS SAID
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गो पालन

800 से अधिक गांवो में गोपालक किसानों को गोपलन के लिये प्रोत्साहन

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Jerry Mauris

गोदुग्ध संकलन

‘श्रीमनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव’

पंचगव्य संकलन, अनुसंधान, प्रयोग एवं प्रशिक्षण हेतु: बहुद्देषीय गोसेवा प्रकल्प 

श्रुति-स्मृति प्रतिपादित ब्रह्मर्ष श्रीवशिष्ठ की तपस्थली एवं श्री नन्दिनी गोचारण भूमि अर्बुदारण्य में एक धर्मात्मा गोभक्त द्वारा कामधेनु गुरूकुलम्, संतसेवार्थ प्राप्त 300 बीघा जमीन पर जुलाई सन् 2005 में श्रद्धेय गोऋर्ष श्रीस्वामीजी महाराज के दो माह का चातुर्मास अनुष्ठान किया था। इस चातुर्मास अनुष्ठान की अवधि में ही उपरोक्त जमीन का समतलीकरण तथा वृक्षारोपण का कार्य प्रारम्भ कर दिया था। दिसम्बर सन् 2005 में गीता जयन्ती के पावन पर्व पर आयोजित रा.का.क.म.के अवसर पर श्री गोधाम पथमेड़ा से जुड़े हुए गोभक्तों को अक्षय भूमि दान की अपील की गई। परिणाम स्वरूप सभी गोभक्तों से कुल 2500 बीघा भूमि प्राप्त हुई। इस समय 1200 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण भी हो गया।

पूज्य सन्तों की पावन प्रेरणा तथा सत्संकल्प से प्रेरित होकर श्री गोधाम पथमेड़ा की महासभा ने 2011 दीपावली के ज्योर्तिमय पर्व तथा गोनवरात्रि के अवसर पर ‘भारतीय गोकल्याण महामहोत्सव’ का ऐतिहासिक एवं अनुपम आयोजन इस भूमि पर करने का निर्णय लिया गया। तथा पूज्य सन्तों की आज्ञा से इस सुरम्य सथान का नाम रखा ‘श्रीमनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव’। यहाँ पर अभिनव ब्रज के रूप में नन्दगाँव, बरसाना, मधुपुरी, वृन्दावन, गोकुल आदि छः गांवों की स्थापना के कार्य प्रगति पर है ।

वर्तमान में 1200 बीघा भूमि पर वृक्षारोपण, गोशाला, घास उत्पादन, विद्यालय, अतिथिभवन, सन्त आवास, छात्रावास, ग्वाला निवास बन चुके है। शेष -गोसंरक्षण एवं गोसंवर्धन, पांच हजार गोवंश के लिए गोचिकित्सालय, दस हजार गोवंश के लिए गो-आवास, पंचगव्य चिकित्सालय एवं अनुसंधानशाला, गोबर गैस आधारित विद्युत निर्माण संयन्त्र, गोग्राम उद्योग प्रशिक्षण केन्द्र, गोरस परिष्करण शाला, पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण, जैविक खेती, भूमि सुधार (समतलीकरण), सुरक्षा दीवार का निर्माण, 250 ग्वाला निवास, कामधेनु आवासीय विद्यालय, सत्संग सभा मण्डप, ग्रीन हाउस (जैविक सब्जियाँ हेतु), नर्सरी आदि का कार्य प्रगृति पर है।

श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगाँव में स्वरोजगार तथा स्वावलम्बन हेतु वर्ष में कई बार छोटे-बड़े प्रशिक्षण शिविर आयोजित होते हंै, जिसमें व्यक्ति, परिवार एवं गांव को स्वावलम्बी बनाने की प्रक्रियाएँ सिखाई जाती है इन प्रशिक्षण शिविरों में से निकलकर सैकड़ों व्यक्तियों ने परिवार एवं गाँवों को स्वावलम्बी बनाने का सर्वहितकारी कार्य प्रारम्भ किया है। इसमें गोकृषि  एवं वनस्पति आधारित रोजगारों का सृजन कर प्रयोगात्मक प्रशिक्षण दिया जाता है।

वेदलक्षणा गाय का गोमय- श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा का संकल्प है कि देशवासियों को शुद्ध आहार (गोकृषि अन्न) प्राप्त हो इसके लिये सभी गोसेवाश्रमों में गोबर निर्मित जैविक खाद तैयार कर आस-पास के गोपालक किसानों को अल्प शुल्क में वितरित की जाती है। आनन्दवन परिसर में गोबर से केंचुआ खाद, सेन्द्रिय खाद तथा ढ़गला खाद सहित विभिन्न गोबर-गोमूत्र की खादों का निर्माण करके गोकृषि अन्न उत्पादन का प्रयोग प्रत्यक्ष श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव परिसर में किया जा रहा है। यह गोकृषि अन्न मनुश्य को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति एवं बौद्धिक ज्ञान प्रदान करता है अर्थात् मनुष्य को सम्पूर्ण आरोग्य के लिये गोकृषि अन्न अपने दैनिक आहार में ग्रहण करना चाहिए।  

वेदलक्षणा गाय का गोमूत्र - श्री गोधाम महातीर्थ, पथमेड़ा के संकल्पानुसार मानव जाति को जहरीले अन्न, पानी, हवा व ऐलोपेथिक दवाईयो से उत्पन्न असाध्य रोगों से मुक्त कराने के लिये श्री कामधेनु पंचगव्य औशधालय द्वारा स्वस्थ गो-बछड़ियो के गोमूत्र से आनन्दवन पथमेड़ा, मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव में अर्क बनाया जाता है। गोमूत्र अर्क, गोमय, दही तथा गोघृत के संयोग से सर्वरोगहर पंचगव्य औशधियों का निर्माण तथा सस्ती दर पर वितरण किया जाता है।

गोमूत्र अर्क में मौजूद तत्व व रसायन के लाभ

 

  •  यह रक्त व विष की विकृति को हटाता है, बड़ी आंत मै गति को शक्ति देता है, शरीर में वात पित्त व कफ दोश को स्थिर रखने में सहयोग करता है।
  • यह अनिच्छित व अनावश्यक वसा को निर्मित होने से रोकता है, लाल रक्त कोशिकाओं एव हीमोग्लोबिन के उत्पादन में सन्तुलन रखता है।
  •  यह जीवाणुनाशी व मूत्रवर्धक होने से विश (टोक्सिन) को नश्ट करता है, मूत्र मार्ग से पथरी को हटाने में सहायक है,  रक्तशुद्धि करता है।
  •  यह तेजाब विहीन, वंशानुगत गठिया रोग से मुक्त करता   है। आलस्य व मांसपेशियों की कमजोरी को हटाता है, कीटाणु नाशक, कीटाणु की वृद्धि रोकता है, (गेन्गरीन) मांस सड़ाव से रक्षा करता है।
  • यह रक्तशुद्धि कर्ता अस्थि में शक्ति प्रदाता  (कीटाणुनाशक), रक्त में तेजाबी अवयवों को कम करता है।
  • यह जीवन में शक्ति व उत्साह वर्द्धन में सक्रियता लाता है  व मानसिक रूग्णता व प्यास से बचाता है। अस्थि में पुनः शक्ति प्रदान कर जीवन में उमंग वृद्धि करते हुए पुनरोत्पादक शक्ति प्रदान करता है। यह रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति वर्द्धक, हृदय को शक्ति व संतोश प्रदान करता है।

वेदलक्षणा गाय का दूध - वैदिक देवताओें, गोसेवा प्रेमी सन्तों, गोउपासक विद्वानों एवं गोसेवापरायण गोभक्तों-गोसेवकों के उपासना, औषधि तथा आहार में उपयोग करने के लिये मनोरमा गोरस भण्डार द्वारा गोशालाओं एवं गोपालकों से वेदलक्षणा गाय का दूध संकलन एवं परिष्करण करके उससे (दुग्धान्न) दुग्ध, दहि, छाछ, घृत, मिठाई आदि का निर्माण एवं वितरण किया जाता रहा है। वेदलक्षणा का दूध- स्वादिष्ट, रुचिकर, स्निग्ध, बलकारक, अतिपथ्य,कांतिप्रद, बुद्धि, प्रज्ञा, मेधा कफ, तुष्टि, पुष्टि वीर्य और ओज को बढ़ाने वाला, आयु को दृढ़ करने वाला, हृदय रसायन, गुरु, पुरुषत्व प्रदान करनेवाला होता है। जहाँ दूध शब्द का प्रयोग होता है वहाँ उसे गाय का ही दूध मानना चाहिये। वेदलक्षणा गाय का दूध संतुलित रूप से शरीर का विकास करता है।

वेदलक्षणा गाय का दही- स्वादिष्ट, बलवर्धक, रुचिकर, तेजस्वी, दीपन, पोष्टिक, मीठा,ग्राह्य अर्श का नाश करने वाला है। डायबिटीज (मधुमेह) के रोगी द्वारा नियमित रूप से देषी गाय के दूध का बना ताजा दही 100 ग्राम सेवन करने से शरीर में स्फुर्ति रहेगी। इससे यह रोग पूर्णतया मिट सकता है।

वेदलक्षणा गाय की छाछ -जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाली और त्रिदोष तथा अर्शका नाश करनेवाली होती है। साधारण छाछ स्वादिष्ट, ग्राही, खट्टी, तुर्श, लघु, गरम, पाक के समय मधुर, तीखी,रुखी,बलप्रद, तृप्तिकर, हृदय को बल प्रदान करने वाली, रूचिकर और शरीर को कृश बनाने वाली होती है।

वेदलक्षणा गाय का घी- आयुवर्द्धक, बुद्धिवर्द्धक, शुक्रवर्धक, रस और पाक में स्वादिष्टि,जठराग्नि को प्रदीप्त करने वाला,स्निग्ध, सुगन्धित, रुचिकर, नेत्रों की ज्योति बढ़ाने वाला, कांतिकारक, वृश्य और मेघा, लावण्य, स्वरकारक, हृदय, तेज और बल देने वाला होता है। बालकों, वृद्धों तथा कमजोरों के लिये ठोस,वात, पित्त, कफ, दमा, विश आदि दोषों का नाश करता है एवं गो दुग्ध, घृत आदि से निर्मित मिठाइयां रूचिकारक, हितकारक, पौष्टिककारक व सुखद् परिणामकारी होती है।

                अतः सभी गोसेवा प्रेमी संतों, गोउपासक विद्वानों, गोभक्तों एवं गोसेवाकों से निवेदन है कि यथा उपलब्ध एवं यथा सम्भव उपरोक्त गोकृषि अन्न, गोदुग्धान्न का अपनी उपासना, औषधि व आहार में प्रयोग करने का प्रयास करें

 

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‘श्री गोधाम महातीर्थ, आन्दवन पथमेड़ा’

वेदलक्षणा गोवंश के लिये प्राणलेवा भयंकर दुष्काल ईस्वी सन् 1987 से 1993 के मध्य गोरक्षा आन्दोलन का विधेयात्मक (सकारात्मक) स्वरूप देशवासियों के सामने आया। उपरोक्त समयावधि में माँ नर्मदा एवं कल्पगुरु दत्तात्रेय भगवान की प्रेरणा से परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज का राजस्थान की भूमि पर लम्बे अज्ञातकाल के बाद आगमन हुआ। कुछ सत्संगी साधकों द्वारा अगस्त सन् 1992 में एकान्त स्थली के रूप में सांचोर शहर के निकट आनन्दवन पथमेड़ा गोचरभूमि पर स्थित कामधेनु सरोवर के सन्निकट स्थान चयनित किया।

यह आनन्दवन पथमेड़ा भारत देश की वह पावन व मनोरम गोचारण भूमि है जिसे भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र से द्वारिका जाते समय श्रावण, भादों महिने में रुककर वृन्दावन से लायी हुई भूमण्डल की सर्वाधिक दुधारू, जुझारू, साहसी, शौर्यवान, सौम्यवान, ब्रह्मस्वरूपा वेदलक्षणा गायों के चरने व विचरने के लिए चुना था। यह आनंदवन मारवाड़, काठियावाड़ तथा थारपारकर की गोपालन लोक संस्कृति का ललित संयोग तो है ही, साथ ही भूगर्भ में बह रही पावन सरस्वती, कच्छ के रण में फैली हुई सिन्धु तथा धरा पर बहने वाली सावित्री (लुणी) नदी द्वारा जन्म-जन्म के पापों का शमन करने वाले श्रीकृष्ण, कामधेनु एवं कल्पगुरु दत्तात्रेय की आराधना का परम पावन त्रिवेणी संगम स्थल है। इसी मांगलिक धरा पर सतचर्चा एवं प्रयोगिक साधना का अनुष्ठान प्रारम्भ हुआ। भगवत् प्रेरणा से इस दिव्य धर्मधरा पर शीघ्र ही परमहंस श्रीमगारामजी राजगुरु एवं पूज्य सिद्ध बाबा हरिनाथजी महाराजका आगमन हुआ। यहाँ निवास करते हुए उपरोक्त महापुरुषों को भगवान की दिव्य गोचारण लीलाओं का स्फुरण हुआ। उसमें एक अतिविशिष्ठ भगवतलीला स्फुरणा में अनुभूति हुई कि ब्रज की सौम्यवान, शोर्यवान एवं ब्रह्मस्वरूपा उन्नत नस्ल की लाखों गोमाताओं के साथ गोप-गोपियों का समूह ब्रज से श्रीद्वारिकापुरी की ओर आ रहा है। उधर श्रीद्वारिकापुरी से श्रीद्वारिकाधीश भगवान अपने कई मंत्रीयों तथा परिजनों के साथ सामने आ रहे हैं। इन दोनों का मिलन इस भूमि पर हुआ, यहाँ कई दिनों तक परस्पर मिलन स्नेहमयी चर्चा और गोदर्शन पूजन, अर्चन करते हुए श्रीकृष्ण भगवान आनन्दातिरेक में विभोर रहे। श्रीउद्धवजी ने भगवान श्रीद्वारिकाधीश को स्मरण करवाया कि अभी-अभी द्वारिका बसी है, वहाँ पर अनेक प्रकार की आशंकाएँ विद्ध्यमान है अतः शीघ्र ही द्वारिकापुरी की ओर चलना चाहिए। श्रीद्वारिकाधीश बोले- कि हे उद्धव! इस स्थान पर भीतर-बाहर सर्वत्र आनन्द ही आनन्द की अनुभूति होती है। मुझे तो यह गोचर वन ही आनन्द से निर्मित लग रहा है,  वास्तव में यह आनन्दवन ही है। यहाँ पर मुझे अपनी अत्यन्त प्रिय गोमाताओं, गोपों आदि के साथ समागम प्राप्त हुआ है। इसी भूमि से वेदलक्षणा गोपालन लोक संस्कृति का विस्तार करने के लिये हमारे यदुवंशी परिवार के किसी एक गोप्रेमी वीर पुरुष का चयन किया जायेगा यह कहकर साथ में आये एक विशिष्ठ पुरुष से गो- गोप- गोपियों के प्रबन्ध का कार्य प्रारम्भ कराके फिर द्वारिकापुरी की ओर चल पड़े। इस लीला दर्शन के बाद प्रातःकाल पूज्य श्रीनाथजी एवं पूज्य श्रीपरमहंसजी ने गोऋषिजी से परामर्श करके इसी स्थान पर राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा महाभियान के लिये अभिजित् मुहुर्त में जाल (पिलू) के वृक्ष पर केसरिया ध्वज चढ़ाकर यह घोषणा की कि भारत में गोपालन लोक संस्कृति की पुनःस्थापना शंखनाद इसी जगह से होगा। इसके बाद में इस आनन्दवन गोचर भूमि को जहरीले किंकरों से मुक्त करवाया। इस भूमि पर सामाजिक सहयोग से वन्य जीवों की हिंसा पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगाया और एक जलकूप, कच्चा संत निवास तथा लघु वृक्षवाटिका का निर्माण किया गया।

सज्जनों! गत 12 शताब्दियों से कामधेनु, कपिला, सुरभि की सन्तान वेदलक्षणा गोवंश पर होने वाले अत्याचार रोकने के लिये 17 सितम्बर, सन् 1993 के दिन सद्गुरु श्रीदत्तात्रेय भगवान एवं जगद्गुरु श्रीगोपालकृष्ण भगवान के सर्वकल्याणकारी भाव से पुनः भारत की पवित्र गोचारण भूमि द्वारिका क्षेत्र आनन्दवन पथमेड़ा से राष्ट्रव्यापी रचनात्मक एवं सृजनात्मक गोसेवा महाभियान का सूत्रपात हुआ। जहाँ सांचोर- राजस्थान के गोरक्षक वीरों द्वारा पाकिस्तान की सीमा से कत्लखाने जाते हुए 8 गायें 5 बच्छड़ों सहित 13 गोवंश को छुड़ाकर इस भूमि पर लाया। स्थानीय गोभक्तों के निवेदन पर पूज्य परमहंस श्रीमगारामजी राजगुरु तथा सिद्ध बाबा हरिनाथजी महाराज के आत्मीय आग्रह एवं पूज्य श्रीगोऋषिजी की स्वीकृति से उपरोक्त वेदलक्षणा गोमाताओं के सहज, सर्वहितकारी आगमन पर गोसेवा का महाप्रकल्प इस धरा पर प्रारम्भ हुआ। पूज्य गोसेवा प्रेमी संतों एवं गोऋषिजी ने इस गोसेवा प्रकल्प का नाम श्री गोधाम महातीर्थ, आन्दवन पथमेड़ा’ रखा।

सन् 1994 में श्रद्धेय स्वामी श्रीरामसुखदासजी महाराज के नोखा चातुर्मास अवसर पर गीताप्रेस के सम्पादक आदरणीय श्रीराधेश्यामजी खेमका से गोसेवा अभियान में प्रचारात्मक सहयोग की अपील परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज द्वारा की गई जिसे उन्होंने सद्भाव से स्वीकार किया। परिणाम स्वरूप सन् 1995 में गोसेवा अंक का प्रकाशन हुआ जिससे पूरे देश को गोसेवा की रचनात्मक तथा सृजनात्मक दिशा प्राप्त हुई। सन् 1995-96 में ही श्री गोधाम पथमेड़ा से प्रेरणा लेकर गोप्रेमी सन्तों, धर्मात्मा सज्जनों के आग्रह से राजस्थान तथा मध्यप्रदेश में गोवंशहितार्थ गोरक्षा अधिनियम में विशेष संशोधन किये गये।

2 फरवरी 1997 में गोधाम पथमेड़ा के पास राष्ट्रीय राजमार्ग 15 से कत्लखाने जाते हुए सैंकड़ों ट्रकों में लदा हुआ हजारों वेदलक्षणा गोवंश स्थानीय गोरक्षक वीरों द्वारा संघर्षपूर्वक मुक्त कराया गया। इस संघर्ष में कई गोरक्षक घायल हो गये और कईयों को जेल भी जाना पड़ा। अन्ततोगत्वा राजस्थान सरकार ने माना कि प्रशासन की गलती से ही इतनी बड़ी संख्या में गोवंश कत्लखाने जा रहा था, इसमें रक्षकों की गलती नहीं थी। अतः सभी गोरक्षकों को निर्दोष घोषित किया गया। इसके बाद राजस्थान व गुजरात में अनेक स्थानों से गोरक्षकों तथा पुलिस द्वारा गोवंश को कसाईयों से छुड़वाकर श्री गोधाम पथमेड़ा के आनन्दवन परिसर में ही भेजा जाने लगा। नवम्बर सन् 1999 तक इस परिसर में गोवंश की संख्या 45 हजार तक पहुँच गयी। जगह कम पड़ने के कारण शेरपुरा और टेटोड़ा (गुजरात) तथा गोलासन व खिरोड़ी राजस्थान की गोचरभूमियों पर नये गोसेवा केन्द्रों की स्थापना की गई।

पूज्या गोमाता, परम पूज्य सद्गुरुदेव भगवान एवं मां नर्मदा, गौरी की आज्ञा व सत् पुरूषो के स्वपनादेश पूज्य श्री ब्रह्मऋषि मगारामजी राजगुरु, श्रद्धेय स्वामी रामसुखदासजी महाराज एवं सिद्ध बाबा हरिनाथजी, पूज्य श्रीत्यागमूर्ति गणेशानन्दजी महाराज की प्रेरणा से परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज के मार्गदर्शन में 18-20 दिसम्बर, 1999 को श्री पथमेड़ा गोधाम के आनन्दवन परिसर में ऐतिहासिक एवं अनुपम ‘‘राष्ट्रीय कामधेनु कल्याण महोत्सव’’ का दिव्य आयोजन हुआ। जिसमें देश के मूर्धन्य धर्माचार्यगण, संत-महात्मा, गोप्रेमी समाजों के धर्मगुरू, समाज के मुखिया, कई सेवा संगठनों के प्रमुख, अनेक राजनैतिक पार्टियों के पदाधिकारी, केन्द्रीय तथा प्रांतीय शासन के प्रतिनिधिगण, गोभक्त धर्मात्मा व्यापारी, गोवैज्ञानिक तथा गोपालक किसानों ने लाखों की संख्या में भाग लिया। इस अपूर्व राष्ट्रव्यापी रचनात्मक महाभियान के प्रथम आयोजन की सफलता से घबराकर गोघातियों ने 20 दिसम्बर की रात्रि को फलौदी जोधपुर (राजस्थान) से रेल द्वारा कत्लखाने जाते हुए गोवंश को रोकने के लिए रेलवे पटरी पर धरना देकर बैठे हुए गोरक्षक गोभक्त श्रीमुरलीधरजी बोहरा की हत्या कर दी गई। गोभक्तों के दबाव से सरकार ने हत्यारों को गिरफ्तार करके कारावास में डाला। राजस्थान सहित सम्पूर्ण भारत में गोरक्षा अभियान को गतिशील बनाए रखने के लिए आयोजन प्रतिवर्ष गीता जयन्ती के पावन पर्व पर 2010 से पूर्व ‘राष्ट्रीय कामधेनु कल्याण महोत्सव’ एवं गोपाष्टमी पर्व पर 2011 से ‘‘गोनवरात्रि महोत्सव’ के रूप में श्रीपथमेड़ा गोधाम की प्रेरणा से होते रहे है।

इस लम्बी अवधि में श्री गोधाम पथमेड़ा द्वारा प्रायोजित राष्ट्रव्यापी रचनात्मक गोसेवा महाभियान के अन्तर्गत द्वादश राष्ट्रीय कामधेनु कल्याण महोत्सव तथा पांच गोनवरात्रि महामहोत्सव, गोसेवा संत समागम, विराट गोरक्षा सम्मेलन, गोभागवत कथा, गोभक्तमाल कथा, गोकथा, गोवत्स पाठशाला, गोविज्ञान संगोष्ठियाँ, गो-गोविन्द संकीर्तन आदि गोरक्षार्थ, गोहितार्थ अनेक मांगलिक एवं प्रेरक अनुष्ठानात्मक कार्यक्रम देश के विभिन्न भागों में आयोजित हुए। इन आयोजनों में भारत के मूर्धन्य सन्त महापुरूषो, गोभामाशाहों, देश के प्रमुख शासकों, धर्मात्मा गोभक्तों, गोसेवी संस्थाओं के संचालक गोसेवकों एवं सहस्रों गोपालक किसानों ने भाग लिया।

श्री गोधाम पथमेड़ा द्वारा प्रायोजित राष्ट्रव्यापी गोसेवा महाभियान का अनुकरण करते हुए पूरे देश में एक अघोषित एवं असंगठित रचनात्मक तथा सृजनात्मक गोसेवा आन्दोलन का प्राकट्य हुआ। राजस्थान, गुजरात,  पंजाब, छत्तीसगढ़,  उड़ीसा,  उत्तराखण्ड,  हरियाणा,  हिमाचल,  महाराष्ट्र,  कर्नाटक सहित अनेक प्रांतों में पूज्य गोप्रेमी संतो की प्रेरणा तथा मार्गदर्शन में प्रादेशिक गोसेवा समितियों का गठन हुआ और देश के विभिन्न भागों में साढ़े पांच हजार से अधिक वेदलक्षणा गोवंश संरक्षण केन्द्र प्रारम्भ किये गये, एक हजार से अधिक गोसंवर्धन केन्द्रों की स्थापना हुई, सौ से अधिक स्थानों पर पंचगव्य परिष्करण एवं अनुसंधान का कार्य प्रारम्भ हुआ,  हजारों किसानों ने गो-आधारित कृषि उद्ध्योग को पुनः अपनाया,  लाखों किसानों ने घर-घर गोपालन प्रारम्भ किया, लाखों धर्मात्मा लोग प्रतिदिन गोग्रास प्रदान करने लगे और इतने ही लोग अपने दैनिक जीवन में पंचगव्य प्रयोग के लिये संकल्पित हुए तथा लगभग दस प्रांतों में गोरक्षा एक्ट में संशोंधन हुए और भारत के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गोवंश की रक्षा के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय दिया गया।

इस अवधि में विशेष उल्लेखनीय कार्यक्रम सन् 1999 में महोत्सव के अवसर पर देश के अनेक संतों,  महापुरुषों और गोभक्त धर्मात्माओं की उपस्थिति में पूज्य त्यागमूर्ति स्वामी श्रीगणेशानंदजी महाराज एवं ब्रह्ऋषि श्री विश्वात्मा बावराजी महाराज तथा माननीय अशोकजी सिंघल के करकमलों से सम्पूर्ण गोवंश संरक्षण हेतु नियमित गोग्रास अर्पण योजना प्रारम्भ की गई। सन् 2005 में राष्ट्रीय कामधेनु कल्याण महोत्सव के अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्यजी महाराज, पूज्य ब्रह्ऋषि श्रीतुलसारामजी महाराज सहित देश के प्रमुख संतों की पावन सन्निधि में भारत के तत्कालीन महामहिम उपराष्ट्रपति श्रीभैरूसिंह शेखावत द्वारा गोचर भूमि विस्तार हेतु अक्षय भूमिदान योजना प्रारम्भ की गयी थी। इन योजनाओं से देश के अनेक धर्मात्मा सज्जन जुड़कर नियमित गोसेवा कर रहे है।

श्रीपथमेड़ा गोधाम की पावन प्रेरणा से कर्नाटक राज्य के रामचन्द्रपुर में सन् 2007 को गोकर्णपीठाधीश्वर श्रीराघवेश्वरभारतीजी महाराज के संयोजकत्व में विश्व गोरक्षा सम्मेलन का आयोजन हुआ। जिसमें अनुमानित 17 देशों के 15 लाख लोग सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन से दक्षिण भारत में गोभक्ति की लहर सी चल पड़ी थी।

सन् 2008 में राजस्थान प्रदेश में सम्पूर्ण गोवंश संरक्षण के लिये हजारों गोभक्तों द्वारा सत्याग्रह किया गया जिसमें स्वामी श्रीनारायणपुरीजी महाराज, ब्रह्मचारी श्रीजगदीश चैतन्यजी महाराज, पं. श्रीपुखराजजी द्विवेदी की अगुवाई में 63 गोभक्त आमरण अनशन पर बैठे थे और पूरा प्रदेश आन्दोलित हो रहा था। आन्दोलन के पाँचवें दिन राज्य सरकार का एक विशेष प्रतिनिधिमण्डल वायुयान द्वारा श्रीपथमेड़ा गोधाम के आनन्दवन परिसर में पहुंचा और वहाँ पर संतों व गोभक्तोंके समक्ष सहस्रों गोमाताओं के मध्य विकलांग गोवंश सम्पोषण सहित गोसेवार्थ विभिन्न प्रतिज्ञाएँ की गई थी।

सन् 2009 में योगऋषि स्वामी श्री रामदेवजी महाराज के सान्निध्य में कामधेनु क्रान्ति योग विज्ञान शिविर तथा ब्रह्ऋषि श्रीतुलसारामजी महाराज का चातुर्मास गो-मंगल महोत्सव गोधाम पथमेड़ा में हुआ जिससे सहस्रों लोगों ने नियमित गोसेवा का संकल्प लिया और लगभग आधे भारत में गोसेवा का संदेश पहुंचाया।

सन् 2010 में पूरे देश में जन- जाग्रति हेतु गोकर्णपीठाधीश स्वामी राघवेश्वरभारतीजी के सान्निध्य में तथा रा.स्व.संघ के संयोजकत्वमें विश्व मंगल गोग्राम यात्रा द्वारा भारत के प्रत्येक गाँव तक गोसेवा का संदेश पहुंचाने का प्रयास हुआ।

सन् 2011 में 52 सौ वर्षों के बाद पुनः गोनवरात्र अनुष्ठान के रूप में आदि शक्ति सुरभि गोमाता की उपासना के प्रचारार्थ ‘‘भारतीय गोकल्याण महामहोत्सव’’ का विराट आयोजन अर्बुदारण्य क्षेत्र में गोधाम पथमेड़ा द्वारा स्थापित एवं संचालित श्री मनोरमा गोलोकतीर्थ, नन्दगांव परिसर की पावन भूमि पर सम्पन्न हुआ। इस आयोजन में भारत के गोप्रेमी सन्तों को,  गो-उपासक विद्वानों को,  गोभक्त भामाशाहों को तथा गोपालक किसानों को पूज्या गोमाता की कृपा से अद्भुत अवर्णनीय आध्यात्मिक ऊर्जा की प्राप्ति हुई। इसके बाद तत्काल पूज्य श्री स्वामी राजेन्द्रदासजी महाराज के सान्निध्य में ब्रज चौरासी कोस ‘‘गो-यात्रा’’ का पावन अनुष्ठान हुआ जिससे हजारों लागों को गोपालन तथा गोव्रत लेने की अमोघ प्रेरणा प्राप्त हुई तथा परमहंस स्वामी श्रीप्रज्ञानानन्दजी महाराज के मार्गदर्शन में गोसेवा समिति, उड़ीसा का गठन किया गया।

सन् 2012 में इस तरह का दिव्य और भव्य आयोजन सूर श्याम गोशाला चन्द्रसरोवर में सम्पन्न हुआ। जिससे ब्रजवासियो में पुनः द्वापर युग की  स्मृतियाँ जाग्रत हो गई।

13 मार्च 2013 को राजस्थान के गोभक्तों द्वारा गोवंश के हितार्थ राजधानी जयपुर में ऐतिहासिक ‘‘सुरभि संकीर्तन मोर्चा’’ का आयोजन हुआ। जिसमें 30 हजार से अधिक गोभक्त-गोप्रेमी सम्मिलित हुए। परिणाम स्वरूप स्वतन्त्र भारत में पहली बार तत्कालिक मुख्यमंत्री श्रीअशोकजी गहलोत, राजस्थान सरकार ने विकलांग गोवंश के सतत् पोषण व चिकित्सा का स्थायी अध्यादेश पारित किया।

 

सन् 2014 की गोनवरात्रि महोत्सव के बाद पूज्या गोमाता की कृपा प्राप्ति हेतु गो-गायत्री दिव्य उपासना की पावन प्रेरणा गोसेवा प्रेमी सन्तों के पवित्र हृदय में स्फुरित हुई। यह पावन अनुष्ठान श्री गोधाम पथमेड़ा के आयोजकत्व में विश्व में गोहत्या का कलंक समूल मिट जाय,  गोपालन लोकसंस्कृति की पुनः समाज में प्रतिष्ठा हो एवं  वेदलक्षणा गोमाता की रक्षार्थ 7 नवम्बर, सन् 1966 में बलिदान हुए सैंकड़ों देवात्माओं को भावांजलि देने हेतु संतों की प्रेरणा से ही श्री गोधाम पथमेड़ा के बहुआयामी प्रकल्प श्रीमनोरमा गोलोकतीर्थ,  नन्दगांव के परिसर में दिसम्बर 2014 से होना निश्चित हुआ। परम श्रद्धेय गोऋषि स्वामी श्रीदत्तशरणानन्दजी महाराज की पावन उपस्थिति में 16 महीनों की अवधि पर्यन्त अर्थात् 8 अप्रेल, 2016 तक चौबीस लाख के ‘‘ 33 गो-गायत्री महापुरुश्चरणों’’ का अनुष्ठान तैंतीस गो-गायत्री उपासकों द्वारा सम्पूर्ण गोवंश संरक्षण, सम्पोषण, संवर्धन के लिये ज्ञात इतिहास का दीर्घकालीन अपूर्व अनुष्ठान आदिशक्ति श्रीसुरभि गोमाता की प्रेरणा से एवं भगवत्कृपा से अनुप्राणित होकर सम्पन्न हुआ। इस अनुष्ठान की अवधि में चारों वेदों, अठारह पुराणों, श्रीभागवतजी, रामायण, महाभारत, ब्राह्मण ग्रन्थों मनु स्मृति आदि का विद्वान विप्रों द्वारा इसी परिसर में पारायण किया गया। पूज्या गोमाता की पावन कृपा राष्ट्र व राष्ट्रवासियों को प्राप्त हो, इस हेतु गोप्रेमी सनातनधर्मी हिन्दू जाति के विभिन्न समाजों का समागम और समाज सेवी संगठनों के सम्मेलन शिविर व संगोष्ठियों सहित अनेक आयोजन इस गोलोकतीर्थ परिसर में सम्पन्न हुए।

उपरोक्त गोहितकारी अनुष्ठानों के आयोजनों में गोसेवा के सभी बिन्दुओं पर विचार, मन्थन, चिन्तन, निष्कर्ष एवं सहमतिके साथ-साथ ही वेदलक्षणा गोवंश का संरक्षण, सम्पोषण, संवर्धन, पंचगव्य विनियोग के कुछ प्रयोग भी प्रारम्भ किये गये। जिसके उत्साहकारी परिणाम सामने आये हैं। इससे प्रेरित होकर शास्त्र प्रमाण,  सत् चिन्तन विवेक तथा अनुभव के आधार पर गोसेवा अनुष्ठान को राष्ट्रव्यापी रचनात्मक एवं सृजनात्मक महाभियान का रूप देने हेतु प्रमुख चार चरणों में विभाजित किया गया- गोवंश संरक्षण, गोपालन, गोसवंर्धन, पंचगव्य परिष्करण एवं विनियोग।

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श्री गोधम पथमेड़ा महतीर्थ

जय गो माता जय गोपाल

श्री गोधाम महातीर्थ पथमेड़ा

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